
कुशीनगर जिले के सुकरौली विकासखंड क्षेत्र के पैकौली गांव में बकरीद का पर्व इस वर्ष बड़े ही हर्षोल्लास, आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ मनाया गया। सुबह से ही मुस्लिम समुदाय के लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। लोगों ने ईदगाह और मस्जिदों में पहुंचकर विशेष नमाज अदा की तथा देश और समाज में अमन-चैन की दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद दी और आपसी सौहार्द का संदेश दिया।
इस अवसर पर गांव के समाजसेवी सरताज आलम ने कहा कि बकरीद केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और इंसानियत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “नफ़रत की आँधियाँ चाहे कितनी भी तेज़ क्यों न हों, मोहब्बत का चराग़ कभी बुझ नहीं सकता।” उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी धर्मों का मूल संदेश प्रेम, दया और भाईचारा है और हमें इसी भावना के साथ समाज में एकता बनाए रखनी चाहिए।
सरताज आलम ने हज़रत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) की कुर्बानी का जिक्र करते हुए कहा कि असली कुर्बानी अपने अंदर की बुराइयों, अहंकार, लालच और नफ़रत को खत्म करने की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब दुनिया नफ़रत और तनाव से गुजर रही है, ऐसे पर्व लोगों को इंसानियत और आपसी सद्भाव का संदेश देते हैं।
बकरीद के मौके पर लोगों ने गरीबों और जरूरतमंदों की मदद कर मानवता का परिचय दिया। बच्चों और युवाओं में भी त्योहार को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। पूरे गांव में खुशियों और भाईचारे का माहौल बना रहा।
ग्रामीणों ने कामना की कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, बरकत और खुशहाली लेकर आए तथा समाज में प्रेम और एकता की भावना लगातार मजबूत होती रहे।












